बुधवार, 13 अप्रैल 2011

shekhar saxena: रेल प्रशासन

shekhar saxena: रेल प्रशासन: "रेल प्रशासन की अनसुलझी पहेलिया आज भारत आज़ाद हुए ६० साल हो गये. आप को प्रशन नही हुवा है की आज भारत मे लोक शाही चल र्ही है तो फिर रेल मे ..."

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रेल प्रशासन

रेल प्रशासन की अनसुलझी पहेलिया आज भारत आज़ाद हुए ६० साल हो गये. आप को प्रशन नही हुवा है की आज भारत मे लोक शाही चल र्ही है तो फिर रेल मे प्रथम श्रेणी ओर द्रितीय श्रेणी असे वर्ग क्यो राखे गये है. लोकसाही मे तो सभी समान है तो यह केसी विसन्ग्तत क्यो है क्या यह विसनगतता हमारे बंधारण मॅ किस कॉलम मे दी गई है ? तो इस का अर्थ है की सरकारको ही पता नही है की हमारा बंधारण सब नागरिक को समान अधिकार देती है तो आज अएसे दनिक ओर ग़रीब के बीच यह केशा फ़र्क सरकारी सेवा मे दिया गया है ?///

चुटकी

बदलता रहता है हर दम मिज़ाजे- यार चुटकी में, कभी इनकार चुटकी में, कभी इक़रार चुटकी में कहीं ऐसा न हो हो जाए वह बेज़ार चुटकी में  तुम उससे कर रहे हो दिल्लगी बेकार चुटकी में।